क्यों लेबनान में हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम का अल्टीमेटम शांति की बची-खुची उम्मीदों को खत्म कर रहा है

क्यों लेबनान में हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम का अल्टीमेटम शांति की बची-खुची उम्मीदों को खत्म कर रहा है

मिडिल ईस्ट में शांति की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं। हकीकत यह है कि जमीन पर सिर्फ बारूद बरस रहा है और मासूम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। लेबनान में एक बार फिर यही खौफनाक मंजर देखने को मिला जब इजरायल ने भीषण एयर स्ट्राइक की। इस हमले में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला ठीक उस वक्त हुआ जब हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम ने एक नया अल्टीमेटम जारी कर इजरायल के साथ किसी भी समझौते को सिरे से खारिज कर दिया। दोनों तरफ से बढ़ती यह तल्खी साफ इशारा कर रही है कि यह जंग थमने वाली नहीं है बल्कि एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

यह पूरी स्थिति केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है। यह एक ऐसा जाल बन चुका है जिसमें आम नागरिक पिस रहे हैं। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच का यह ताजा टकराव क्यों इतना गंभीर है और नईम कासिम की नई धमकी के क्या मायने हैं, इसे गहराई से समझने की जरूरत है।

नईम कासिम की सीधी चेतावनी और इजरायल का पलटवार

हिजबुल्लाह के नए प्रमुख नईम कासिम ने साफ कर दिया है कि संगठन अपने हथियार किसी भी कीमत पर नहीं डालेगा। उन्होंने लेबनान के आत्मसमर्पण के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वे एक लंबे संघर्ष के लिए तैयार हैं। कासिम ने अमेरिका और इजरायल की शर्तों वाले किसी भी शांति प्रस्ताव को मानने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि लेबनान की सुरक्षा के लिए उनका सशस्त्र प्रतिरोध बेहद जरूरी है और किसी बाहरी दबाव में आकर इसे खत्म नहीं किया जाएगा।

इस कड़े रुख के तुरंत बाद इजरायली वायुसेना ने लेबनान के विभिन्न ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी। दक्षिणी लेबनान और बेरूत के आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों ने भारी तबाही मचाई है। ताजा एयर स्ट्राइक में दो नागरिकों की मौत हो गई और अस्पतालों में घायलों की कतार लग गई। यह सीधे तौर पर संदेश था कि इजरायल किसी भी अल्टीमेटम के आगे झुकने वाला नहीं है।

क्यों बार-बार टूट रहे हैं युद्धविराम के समझौते

नवंबर 2024 में दोनों पक्षों के बीच एक बड़ा युद्धविराम समझौता हुआ था। तब लगा था कि शायद अब शांति बहाल हो जाएगी। लेकिन वह समझौता सिर्फ कुछ समय का भ्रम साबित हुआ। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हजारों बार नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। हिजबुल्लाह का दावा है कि इजरायल ने उसकी संप्रभुता का दस हजार से ज्यादा बार उल्लंघन किया। दूसरी तरफ इजरायल का कहना है कि हिजबुल्लाह लगातार सीमा पार ड्रोन और रॉकेट हमले कर रहा है।

समझौते के जमीनी स्तर पर फेल होने के पीछे कुछ बड़े कारण हैं।

  • बफर जोन का विवाद - इजरायल दक्षिणी लेबनान में एक ऐसा सुरक्षा घेरा चाहता है जहां हिजबुल्लाह का नामोनिशान न हो। हिजबुल्लाह इसे अपनी जमीन पर कब्जा मानता है।
  • हथियारों को छोड़ने की शर्त - इजरायल और अमेरिका की मुख्य मांग है कि हिजबुल्लाह को पूरी तरह निशस्त्र किया जाए। हिजबुल्लाह के लिए यह उसकी मौत के वारंट जैसा है।
  • विदेशी सेना की मौजूदगी - लेबनान की धरती पर इजरायली सैनिकों की किसी भी तरह की मौजूदगी को हिजबुल्लाह ने पूरी तरह अस्वीकार्य घोषित कर दिया है।

जमीनी हकीकत और आम जनता का दर्द

इस पूरी राजनीतिक और सैन्य उठापटक के बीच लेबनान की आम जनता का जीवन पूरी तरह तबाह हो चुका है। अल जजीरा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट बताती हैं कि अब तक हजारों लोग घायल हो चुके हैं और एक लाख से अधिक नागरिक अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर हुए हैं। स्कूल, अस्पताल और बुनियादी ढांचे पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

यह लड़ाई अब सिर्फ सीमावर्ती गांवों तक सीमित नहीं है। इजरायल के लड़ाकू विमान अब बेरूत के रिहायशी इलाकों को भी निशाना बना रहे हैं। आम लोगों के पास न तो छिपने की जगह बची है और न ही बुनियादी सुविधाएं। जब भी कोई मिसाइल गिरती है, तो केवल इमारतें नहीं गिरतीं, बल्कि कई हंसते-खेलते परिवार हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं।

क्या है ईरान और अमेरिका का इस खेल में रोल

इस युद्ध को समझने के लिए पर्दे के पीछे चल रहे खेल को देखना होगा। हिजबुल्लाह को सीधे तौर पर ईरान का समर्थन हासिल है। हथियार, पैसा और रणनीतिक मदद सब कुछ तेहरान से आता है। नईम कासिम के इस आक्रामक रुख के पीछे ईरान की शह साफ दिखाई देती है। ईरान इस क्षेत्र में इजरायल के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए हिजबुल्लाह को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

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दूसरी तरफ अमेरिका पूरी तरह से इजरायल के साथ खड़ा है। वाशिंगटन लगातार लेबनान सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह हिजबुल्लाह को कमजोर करे। लेकिन लेबनान की अपनी सेना इतनी मजबूत नहीं है कि वह हिजबुल्लाह का सामना कर सके। अमेरिका की मध्यस्थता में जितने भी शांति प्रयास हुए हैं, उन्हें हिजबुल्लाह ने हमेशा 'गुलामी का दस्तावेज' कहकर ठुकरा दिया है।

आगामी रणनीतिक कदम और आगे का रास्ता

इस तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले दिन और भी भयानक हो सकते हैं। अगर आप इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं, तो आपको आने वाले समय में इन मुख्य बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।

नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की खबरों को ट्रैक करते रहें क्योंकि जमीनी हालात हर घंटे बदल रहे हैं। केवल सरकारी बयानों पर भरोसा करने के बजाय स्वतंत्र पत्रकारों और ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग को पढ़ें ताकि सच्चाई समझ आ सके। मिडिल ईस्ट के इस संकट का असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, इसलिए वित्तीय मोर्चे पर भी सतर्क रहना जरूरी है।

शांति की उम्मीदें अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। नईम कासिम का अल्टीमेटम और इजरायल की बमबारी यह साफ करती है कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। यह जंग अब एक ऐसे दौर में पहुंच गई है जहां जीत किसी की नहीं होगी, सिर्फ बर्बादी होगी।

SY

Sophia Young

With a passion for uncovering the truth, Sophia Young has spent years reporting on complex issues across business, technology, and global affairs.